साहित्य / कहानियां



याद है वह अनमोल उपहार

2012-07-06 03:51 PM को कहानियां पर प्रकाशित
    अलमारी से कपड़े निकालते-निकालते हल्के हरे रंग का एक रुमाल हाथ में आ गया , जिस पर गाढ़े हरे रंग से फूल के सुंदर डिज़ाइन के ऊपर मंडे यानी सोमवार लिखा हुआ था. उस रुमाल को हाथ में…

[ लेखक : लीला तिवानी ]

अकेले होने का अहसास

2012-06-09 07:56 AM को कहानियां पर प्रकाशित
                          लावण्या आज घर पर अकेली थी. उसे ऐसा लग रहा था कि उदासी ने उसे बुरी तरह से अपने घेरे में जकड़ लिया था. आज उसके पति…

[ लेखक : लीला तिवानी ]

शायद!

2012-05-19 10:17 AM को कहानियां पर प्रकाशित
                                                        शर्मिष्ठा ने सारी उम्र सेवा में बिताई. शादी से पहले अपनी मां…

[ लेखक : लीला तिवानी ]

अनमोल सीख

2012-05-07 12:00 PM को कहानियां पर प्रकाशित
   सुशीला अपने नाम के अनुरूप सद्गुणों के साथ-साथ अपनी तेज़ चाल के भी प्रसिद्ध थी. वह पार्क में अपनी चाल से सैर कर रही थी और हर मिलने वाले से राम-राम, नमस्ते आदि करती जा रही थी. तभी एक…

[ लेखक : लीला तिवानी ]

अघरा

2012-04-26 03:15 PM को कहानियां पर प्रकाशित
      नारी  तुम्हें अबला कहा जाता है  एक समय था जब नारी  अपने को  अबला स्वीकारने लगी थी  अब  शिक्षा के प्रसार के कारण  या कि  विज्ञान के विभिन्न विस्मयकारी  तथ्यों का पता लगने से  नारी अपने को…

[ लेखक : लीला तिवानी ]

खुदा की मार

2012-04-16 09:04 AM को कहानियां पर प्रकाशित
     हर व्यक्ति, चाहे वह कोई भी काम क्यों न करता हो, जब भी रोज़ी-रोटी के लिए घर से निकलता है तो, अपने इष्टदेव से यह प्रार्थना करके निकलता है कि आज का दिन ठीक से निकले और…

[ लेखक : लीला तिवानी ]
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