क्या इसे सिर्फ़ बढ़ती उम्र का असर समझ रहे हैं? प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें, विशेषज्ञों की सलाह
रात में बार-बार पेशाब आना, पेशाब की धार कमजोर होना या पेशाब करने में दिक्कत जैसी समस्याओं को अधिकांश पुरुष बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी का सफलतापूर्वक उपचार संभव है, इसलिए ऐसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है। हालांकि, बीमारी बढ़ने पर बार-बार पेशाब आना, विशेषकर रात में, पेशाब शुरू करने या रोकने में कठिनाई, पेशाब या वीर्य में खून आना, या कमर, कूल्हों और पेल्विस में लगातार दर्द जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। ये लक्षण हर बार कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन इनके पीछे की वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अतुल शर्मा ने कहा, "प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई पुरुष शुरुआती लक्षणों को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर डॉक्टर के पास जाने में देर कर देते हैं। यदि समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए तो उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध होते हैं और मरीज के ठीक होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों, विशेषकर जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास रहा हो, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए और किसी भी लगातार रहने वाले मूत्र संबंधी बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।"
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई), गुरुग्राम के चेयरमैन–यूरोलॉजी डॉ. अनिल मंधानी ने कहा, "अधिकांश मामलों में पेशाब संबंधी समस्याएं कैंसर नहीं होतीं, लेकिन बिना जांच के इसका पता नहीं लगाया जा सकता। दुर्भाग्य से कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। पुरुषों में प्रोस्टेट स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने, नियमित जांच को बढ़ावा देने और लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेने की जरूरत है। समय पर पहचान से न केवल उपचार आसान होता है, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाना, शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना इस बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
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