पूर्व विधायक नवीन धीमान की धमकी टेप में-कंपनी बोली फोन और पूरी रिकॉर्डिंग FSL जांच के लिए हाज़िर
कोर्ट से मिली प्लेनेक्स को सुरक्षा, उसी सुबह पूर्व विधायक की धमकी रिकॉर्डिंग में कैद — “4 बजे तक हल नहीं हुआ तो किसी को नहीं छोड़ूंगा”
पूर्व विधायक नवीन धीमान ने सुबह 8:27 बजे प्लांट प्रमुख को फोन पर दी खुली धमकी; व्हाट्सएप पर भेजा शाम 4 बजे का अल्टीमेटम — संदेश ‘डिसअपीयरिंग मोड’ पर, ताकि सबूत सात दिन में खुद मिट जाएं
धमकी के साथ भेजी कंपनी के मालिकों/प्रमोटरों की तमाम कंपनियों की सूची — निशाने पर कारोबारी विवाद नहीं, पूरा प्रमोटर समूह; तीन दिन पहले इसी प्लांट पर फरार एफआईआर-आरोपी राकेश कुमार संग लोहे की रॉडों से लैस भीड़ लेकर पहुंचे थे पूर्व विधायक
कॉल रिकॉर्डिंग, चैट व पीडीएफ एसपी ऊना को सौंपे — कंपनी बोली: बिना काट-छांट की पूरी रिकॉर्डिंग और फोन एफएसएल जांच के लिए हाज़िर; उधर सिविल कोर्ट ने जबरन प्रवेश व बेदखली के खिलाफ प्लेनेक्स का निषेधाज्ञा आवेदन स्वीकार किया
गगरेट/ऊना: जीतपुर बेहड़ी के बहुचर्चित प्लांट विवाद में गुरुवार का दिन निर्णायक साबित हुआ — और दोनों घटनाएं एक ही दिशा में इशारा करती हैं। एक ओर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), अंब की अदालत ने प्लानेक्स प्लास्टिक सॉल्यूशंस के उस निषेधाज्ञा आवेदन को स्वीकार कर लिया जिसमें राकेश कुमार, नवीन धीमान, इंदु बाला व इंडिया पॉलीमर्स को प्लांट में जबरन घुसने, कंपनी को बेदखल करने और मशीनरी-स्टॉक-रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने से रोकने की मांग की गई थी (विस्तृत आदेश प्रतीक्षित)। दूसरी ओर, उसी सुबह 8:27 बजे — कंपनी के अनुसार — पूर्व विधायक नवीन धीमान ने प्लांट प्रमुख लव भारद्वाज को पहले लिखित संदेश भेजा और फिर फोन पर धमकाया।
धमकी, शब्दश:
लिखित संदेश: “If not resolved today before 4 pm then I am going to electronic media” — और फोन पर: “सबको मेरे गुस्से से डरना पड़ेगा, मैं किसी को नहीं छोड़ूंगा।” कंपनी के पास इस कॉल की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद है। ग़ौरतलब है कि संदेश ‘डिसअपीयरिंग मैसेज’ मोड पर भेजे गए थे — यानी सात दिन में सबूत अपने आप नष्ट हो जाते — लेकिन कंपनी ने समय रहते इन्हें सुरक्षित कर लिया। धमकी के साथ एक पीडीएफ भी भेजी गई जिसमें कंपनी के मालिकों/प्रमोटरों की सभी कंपनियों की सूची DIN/CIN नंबरों सहित संकलित थी। समझौते की मंशा रखने वाला व्यक्ति न 4 बजे की डेडलाइन देता है, न मिटने वाले संदेश भेजता है, न प्रमोटरों की कुंडली तैयार करता है। यह समस्त सामग्री उसी दिन पुलिस अधीक्षक ऊना, डीएसपी अंब व थाना गगरेट को सौंप दी गई।
तीन दिन पहले: लोहे की रॉड, फरार आरोपी और जान से मारने की धमकी
यह धमकी अकेली घटना नहीं है। अदालत में दायर वाद व सुरक्षा गार्ड की पुलिस शिकायत के अनुसार, 28 जुलाई की शाम पूर्व विधायक नवीन धीमान उसी प्लांट पर पहुंचे — साथ में था राकेश कुमार, जो अदालत के आदेश पर दर्ज एफआईआर संख्या 52/26 में आरोपी है और दो महीने से पुलिस की पकड़ से बाहर है। लोहे की रॉडों से लैस समूह ने मुख्य गेट तोड़ने का प्रयास किया, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी से मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकी दी। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद है। डीएसपी अंब व एसपी ऊना दोनों मामलों की जांच की पुष्टि कर चुके हैं। सोचने वाली बात — एक पूर्व विधायक दो महीने से फरार आरोपी के साथ सार्वजनिक रूप से घूम रहा है; पुलिस जिसे ढूंढ रही है, वह पूर्व विधायक के साथ प्लांट के गेट पर खड़ा मिलता है।
पैसे का हिसाब: ₹1.64 करोड़ लिए, ₹2 लाख व दस्तावेज़ चुराए, ₹3.50 करोड़ और मांगे
एफआईआर के अनुसार पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है — 31 अगस्त 2025 को इंडिया पॉलीमर के दोनों साझेदारों (राकेश कुमार व इंदु बाला) के हस्ताक्षर से विधिवत स्टांपयुक्त बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट हुआ और प्लांट का कब्जा उसी दिन प्लानेक्स को सौंपा गया। इसके अतिरिक्त प्लानेक्स समूह ने विक्रेता पक्ष को ऋण स्वरूप कुल लगभग ₹1.64 करोड़ दिए — जिसमें से आज तक एक रुपया वापस नहीं आया। 11 मार्च 2026 को राकेश कुमार ने अपने एकाउंटेंट संग प्लांट में घुसकर ₹2 लाख नकदी व बीटीए सहित मूल दस्तावेज़ चुरा लिए; 13 मार्च को फर्म के बैंक खातों व ई-मेल के क्रेडेंशियल चुपचाप बदल दिए; और फिर ₹3.50 करोड़ की रंगदारी मांगते हुए कंपनी का ही प्लांट बेचने की धमकी दी। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अंब ने 21 मई 2026 को दस्तावेज़ों की जांच के बाद माना कि गंभीर संज्ञेय अपराध बनते हैं और एफआईआर के निर्देश दिए — जिस पर बीएनएस की धाराओं 303, 340, 324, 316, 318, 238, 308 व 61 के तहत एफआईआर 52/26 दर्ज हुई। पैसा लेकर सौदे से मुकरना, दस्तावेज़ चुराना और फिर रंगदारी मांगना — यह कारोबारी विवाद नहीं, अपराध की परिभाषा है।
पूर्व विधायक के हर संभावित दावे का जवाब पहले से रिकॉर्ड में
दावा: “सारे रिकॉर्ड इंडिया पॉलीमर्स के नाम हैं, कोई लाइसेंस ट्रांसफर नहीं हुआ।” — जवाब: रिकॉर्ड बदलने के आवेदन प्लानेक्स ने मार्च 2026 में ही दे दिए थे; सहयोग विक्रेता पक्ष ने रोका। और सबसे बड़ी बात — मार्च 2026 में नवीन धीमान व इंदु बाला ने स्वयं थाना गगरेट व केनरा बैंक को हस्ताक्षरित घोषणापत्र देकर बीटीए को वैध और प्लानेक्स को प्लांट का स्वामी स्वीकार किया था। अपने ही हस्ताक्षर के खिलाफ बोलने का कोई रास्ता कानून में नहीं है।
दावा: “स्टेटस-को का आदेश है, प्लेनेक्स उल्लंघन कर रही है।” — जवाब: केस नंबर, कोर्ट और तारीख आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। जबकि ताज़ा स्थिति यह है कि जबरन प्रवेश व बेदखली के खिलाफ अदालती संरक्षण अब प्लानेक्स के पक्ष में है — और अगस्त 2025 से प्लांट का कब्जा भी। जो पक्ष 28 जुलाई को रॉड लेकर गेट तोड़ने पहुंचा, यथास्थिति उसी ने भंग करने का प्रयास किया।
दावा: “मैं तो समझौते की कोशिश कर रहा हूं।” — जवाब: समझौते की भाषा ‘किसी को नहीं छोड़ूंगा’ नहीं होती। समझौते के लिए फरार आरोपी और लोहे की रॉड की जरूरत नहीं पड़ती। और समझौते के संदेश मिटने वाले मोड पर नहीं भेजे जाते।
दावा: “रिकॉर्डिंग फर्जी/एडिटेड है।” — जवाब: कंपनी ने बिना काट-छांट की पूरी रिकॉर्डिंग व संबंधित फोन किसी भी फॉरेंसिक (एफएसएल) जांच के लिए प्रस्तुत करने की पेशकश पहले ही कर दी है। जो सही हो, वह जांच से नहीं भागता।
दावा: “यह मेरी संपत्ति है, धरना दूंगा।” — जवाब: दस्तावेज़ों में नवीन धीमान इंडिया पॉलीमर के साझेदार तक नहीं हैं — साझेदार थे राकेश कुमार व इंदु बाला, जिनके हस्ताक्षर बीटीए पर हैं। बैंक-बंधक व आपराधिक जांच वाली संपत्ति का फैसला अदालतें करती हैं, भीड़ नहीं। जिसके पास कानूनी तर्क बचा हो, वह अदालत जाता है — धरने की धमकी वही देता है जिसके पास अदालत में कहने को कुछ न बचा हो।
तीन दस्तावेज़ की सार्वजनिक चुनौती
कंपनी ने पूर्व विधायक के समक्ष खुली चुनौती रखी है — यदि उनके दावों में सच्चाई है तो वे केवल तीन दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दें: (1) उस ‘स्टेटस-को’ आदेश का केस नंबर, कोर्ट व तारीख जिसका वे हवाला देते हैं; (2) ₹1.64 करोड़ में से एक भी रुपया लौटाने की कोई रसीद; (3) मार्च 2026 में पुलिस व बैंक को दिए अपने हस्ताक्षरित घोषणापत्रों का कोई विधिवत खंडन। इनमें से एक भी दस्तावेज़ आज तक सामने नहीं आया है — क्योंकि है ही नहीं।
सवाल हिमाचल में निवेश के माहौल का भी
प्लानेक्स समूह देश की अग्रणी रीसाइक्लिंग कंपनियों में है, जिसने हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र में निवेश कर स्थानीय रोजगार दिया। कंपनी का कहना है कि यदि करोड़ों का निवेश करने वाले उद्यमी को अदालती संरक्षण, दर्ज एफआईआर और पुलिस जांच के बावजूद रॉड, धमकी और डेडलाइन का सामना करना पड़े, तो यह केवल एक कंपनी का नहीं — हिमाचल प्रदेश में निवेश करने वाले हर उद्यमी की सुरक्षा का प्रश्न है। यह मामला अब प्रदेश की कानून-व्यवस्था और निवेश-मित्र छवि की परीक्षा बन चुका है।
कंपनी का पक्ष
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा: “हमने हर कदम कानून के रास्ते उठाया — अदालत गए, और अदालत ने हमारे प्लांट की सुरक्षा का आवेदन स्वीकार किया। हम केनरा बैंक के बंधक के निपटारे के लिए पहले दिन से तैयार हैं और हर अदालती आदेश का पालन करेंगे। हमारी मांगें स्पष्ट हैं — फरार आरोपी की गिरफ्तारी, 28 जुलाई की घटना और आज की धमकियों पर विधिसम्मत कार्रवाई, तथा हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा। जिसके पास दस्तावेज़ होते हैं, वह अदालत जाता है; जिसके पास कुछ नहीं होता, वह डेडलाइन देता है।”
बीटीए, मार्च 2026 के हस्ताक्षरित घोषणापत्र, न्यायालय का आदेश दिनांक 21.05.2026, एफआईआर 52/26, सिविल वाद व निषेधाज्ञा आवेदन, बैंक पत्राचार, सुरक्षा गार्ड की शिकायत, सीसीटीवी फुटेज तथा आज की कॉल रिकॉर्डिंग व चैट — समस्त सामग्री किसी भी पत्रकार के स्वतंत्र सत्यापन हेतु उपलब्ध है।
— प्लानेक्स प्लास्टिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड
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