हमारे बारे में
सपने वही पूरे होते हैं, जिनमें जान होती है.
पंखों से कुछ नहीं होता, हौंसलों से उड़ान होती है.
बस जिंदगी के इसी सूत्रवाक्य पर भरोसा रखते हुए खबर इंडिया की नींव रखी गई है. यह मीडिया क्षेत्र से जुड़े कुछ ऐसे लोगों का सामूहिक प्रयास है, जो अपने कार्यक्षेत्र में कुछ नया करने का जज्बा रखते हैं. खबर इंडिया हर महीने अपने पाठकों को देश-समाज की वो खबरे देगा, जो आपाधापी के इस दौर में कहीं छूट जाया करती है. हर क्षेत्र से जुड़ी दिग्गज हस्तियां खबर इंडिया के मंच से अपने पाठकों से रूबरू हो, बस यही हमारा एकमात्र मिशन है.
पुष्पेंद्र आल्बे मोबाइल: 098269 10022
पढ़ाई में अव्वल, खूब कीर्तिमान बनाएं, तोड़े, रसायन शास्त्र से स्नातकोत्तर भी किया, लेकिन युवावस्था में कदम रखने के साथ ही लग गया कि ग्यारह से पांच की सरकारी नौकरी करना अपने बस की बात नहीं। श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के बचपन से ही प्रषंसक, सो क्रिकेट के ऊपर लिखना हमेषा ही दिल को भाया। क्रिकेट के साथ ही बॉलीवुड के क्लासिक दिग्गजों-संजीव कुमार, गुलजार साहब जैसो की फिल्में देख-देखकर इसकी भी समझ आ गई। दैनिक जागरण से टेªनी रिपोर्टर के तौर पर काम शुरू किया, फिर गृहनगर छोड़कर मप्र की व्यावसायिक राजधानी इन्दौर में किस्मत आजमाने आ गए। प्रिंट मीडिया से अलग हटकर कुछ करने की चाह हुई, तो खबर इंडिया की नींव रखी। कुछ ही समय में खबर इंडिया इंटरनेट बिरादरी की शीर्ष तीन पोर्टलों में शामिल हो गई है....लेकिन यह तो बस शुरूआत भर है....अभी आगे बहूत दूर जाना है....
क्रिएटिव सलाहकार
मिलन गुप्ता क्रिएटिविटी की ‘क्षिप्रा’ इनके घर के बगल से ही होकर गुजरती है, सो ऐसे में कोई आष्चर्य नहीं कि महाकाल की नगरी के रहवासी इस शख्स ने क्रिएटिव डिजाइनिंग को नई बुलंदियों पर पहुंचाया है। खबर इंडिया को अस्तित्व में लाने का विचार असल में इन्हें ही आया था, वो भी मप्र की व्यावसायिक राजधानी इन्दौर के रेलवे स्टेषन पर गंतव्य के लिए रेलगाड़ी का इंतजार करते हुए। ऐसे में समझा जा सकता है कि इनके दिमाग में चौबीसो घंटे ‘आइडियाज ’ की धमाचौकड़ी मची रहती है।
मोबाइल: 88898 78887
सलाहकार संपादक
संजीव कुमार झा मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के गांव पटुआहा का निवासी। वर्तमान निवास गाजियाबाद की उपनगरी इंदिरापुरम। करीब ढाई दशक से सक्रिय पत्रकारिता से है सरोकार। प्रभात खबर, आर्यावर्त, आज, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, पी7 न्यूज चैनल, स्वाभिमान टाइम्स आदि में योगदान देने के बाद फिलहाल राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘हमवतन’ में वरिष्ठ समाचार संपादक के पद पर कार्यरत। एंटरटेनमेंट (फिल्म, टीवी, म्यूजिक, फैशन आदि) जर्नलिज्म में खास रुचि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में बीस हजार से भी अधिक लेख-निबंध, साक्षात्कार-समीक्षाएं प्रकाशित।
संपर्क: संजीव कुमार झा जी-3, हेमलता अपार्टमेंट, 221-शक्ति खंड-3, इंदिरापुरम, गाजियाबाद-201010, उ. प्र.।
सुभाष चंद्र जन्म और संस्कार से बिहारी, कर्म से पत्रकार। शिक्षा - हिंदी प्रतिष्ठा में स्नातक। पिछले एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निवास। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक, सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रचनाकर्म। आकाशवाणी केंद्र, दरभंगा (बिहार) से कई वार्ताओं और परिचर्चा का प्रसारण। साहित्यिक रचनाकर्म में भी सक्रिय। एक कहानी संग्रह - ‘मुफ्त की चाय’ और एक अन्य पुस्तक ‘कर्मवीर खांडू’ प्रकाशित।
संपर्क: 119, क्रॉस रोड, संत नगर, बुराड़ी, दिल्ली -110084
साउथ ब्यूरो
केवीएस कृष्णा मूलतः आंध्र के, इकॉनामिक्स में ग्रेजूएषन किया और एक तेलगू समाचार पत्र से कॅरिअर की शुरूआत। मीडिया, पीआरओ में सत्रह साल का लंबा अनुभव। मीडिया के साथ ही एक सोषल एक्टिविस्ट के तौर पर भी दक्षिण भारत की जानी-पहचानी शख्सियत।
समाचार संपादक
नीलम शुक्ला छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया। गृहनगर छत्तीसगढ़ रायपुर पर पिछले 8 साल से दिल्ली में कार्यरत। एनसीसी बी सर्टिफिकेट होल्डर और फूटबाल- वालीबाल की रास्ट्रीय खिलाडी। घर में सभी सरकारी नौकरी में माँ प्रोफ़ेसर, पिता राजभवन में अधिकारी और भाई डाक्टर पर इनकी अलग सोच इनको पत्रकारिता में ले आई। माँ चाहती थी ये भी प्रोफ़ेसर बने सो हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर किया पर पत्रकारिता की डिग्री लेने के साथ ही राह बदल गई। पिछले एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।शुरुवात इलेक्ट्रानिक मीडिया से पर अब प्रिंट में मे मज़बूत पकड़। फीचर व छत्तीसगढ़ के मामलों पर गहरी पकड़। फिलहाल एक क्राइम मैगज़ीन की एसोसियेट एडिटर।
संपर्क: ई-19 ब सेकण्ड फ्लोर, जनता गार्डन, पांडव नगर, मयूर विहार-1 नई दिल्ली-91
ब्रांड डेव्हलपमेंट हेड
प्रथम कुमार झा मनिवास एवं कर्मस्थली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली। मूल रूप से बिहार का निवासी। शिक्षा उतनी, जितनी 21वीं सदी में जीने के लिए जरूरी। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन - सूक्त को आत्मसात करता हुए जीवन पथ का पाथेय। जब भी किसी जरूरतमंद को देखा, तुरंत मदद को हाथ बढ़ाया। बिन मांगे सलाह देना आदत में नहीं है शुमार। साहित्य और संगीत से है सरोकार। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले 5 वर्षो में ब्रांडिंग के क्षेत्र में कार्यरत। इस दौरान जलते दीप, दैनिक जागरण, स्वाभिमान टाइम्स एवं हमवतन में कार्यरत।
संपर्क: प्रथम कुमार झा 609-37, पटपड़गंज, मंडावली, दिल्ली. 110092
संपादक मंडल
दिलीप सिकरवार
दैनिक भास्कर के करियर पेज पर (1997 में ) पहली बार अपना लेख देखा तो खुशी का ठिकाना न रहा. फिर ऐसी खुशियाँ लगातार मिलते रहीं. उन दिनों स्नातक की पढाई चल रही थी. लिखने के साथ-साथ पत्रकारिता कोर्स (बीजेएमसी) में दाखिला ले लिया, एम् ऐ हिंदी साहित्य तब तक पूरा हो चुका था. लिखने का शौक अब पेशा बन चुका था . अब मैं डिग्रीधारी पत्रकार था. पत्रिका, दैनिक जागरण, नवभारत. राज एक्सप्रेस, बिच्छू डाट कॉम, शिखरवार्ता, राष्ट्रीय जनादेश, प्रादेशिक जनमत,समय जगत जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कलम घिसी.लिखने से थोडा मन विचलित हुआ तो बोलने के लिए आकाशवाणी में अवसर मिला, जो आज भी जारी है. दूरदर्शन के कल्याणी धारावाहिक में ‘एंटी मास्कुतो ’ एड में नजर आते हैं. अब फिर तैयार हूँ सच लिखने के लिए. वर्तमान में हमवतन (नई दिल्ली) और आपका साथ है.
डॉ उमेश पुरी ज्ञानेश्वर
ज्योतिष निकेतन संदेश नामक गूढ़ विद्याओं का गूढ़ार्थ बताने वाली हिन्दी पत्रिका के संपादक।
1977 से ज्योतिष के कार्य में संलग्न। विभिन्न विषयों पर 67 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।
पंचम अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन 1991 में ज्योतिष भास्कर उपाधि से अलंकृत।
फ्यूचर पाइंट द्वारा ज्योतिष मर्मज्ञ की उपाधि से अलंकृत।
साहित्य संपादक
लीला तिवानी
शिक्षा हिंदी में स्नातकोत्तर, 'एम.ए., एम. एड.' , कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड । दिल्ली राज्यस्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत । हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित । अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।
मार्गदर्शक
राजीव शर्मा
सही मायनों में, इनके बारे में जितना भी लिखा जाए कम है. उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ अभिभाषकों में इनका नाम सबसे पहले लिया जाता है. पिछले दो दशक में तकरीबन हर मुद्दें पर न्यायालय में अपनी अमिट छाप छोड़ी है. यह तो हुई न्यायालय की बात, लेकिन न्यायालय के बाहर भी इनका कोई जवाब नहीं. दर्जनों स्वयंसेवी संस्थाओं से तो जुड़े ही हैं, पायरेसी के खिलाफ मुहिम में भी सबसे आगे. जाहिर है, खबर इंडिया परिवार के मार्गदर्शन के लिए इनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता था. सो, अब वे मार्गदर्शक की भूमिका में हमारा संबंल बढ़ाने के लिए हमारे साथ है.
वैब मास्टर
रोहित पंवार (रोहन)
मोबाइल: 95891-16967
उम्र बीस साल, लेकिन फेसबुक के संस्थापक मार्क जुबेरबर्ग को चुनौती देने के हौंसले के साथ इन्दौर निवासी रोहन पंवार ने अपने कॅरिअर का बस आगाज ही किया है, लेकिन उपलब्धियां अभी से खाते में है। मप्र के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए डायनामिक वेबसाईटे बनाने के बाद रोहन ने इतनी कम उम्र में ही ऑनलाइन बिरादरी के शीर्ष पोर्टलों में शुमार होने वाली खबर इंडिया की जिम्मेदारी भी संभाल ली है। उनका एक ही सपना है कि फेसबुक की तरह ही खुद का साम्राज्य स्थापित किया जाए, जिसकी शानदार शुरूआत तो हो ही चुकी है.
Website: RWEB
विशेष संपादकीय सलाहकार
लिमटी खरे
हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किया है। हमने पत्रकारिता 1983 में सिवनी से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर में अनेक अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .
सहायक संपादक
सोमा रॉय
कानपुर से नाता है इनका. शहर के जागरण मॉस कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से एक साल का पोस्ट ग्रेजूएट डिप्लोमा. बेहद कम उम्र में भी आलराउंडर है, मतलब यह कि हर तरह की खबरें लिख लेती है. लखनऊ के सहारा नेक्स्ट वेब मीडिया के साथ जुड़ी रही हैं. प्रिंट मीडिया के साथ ही पटकथा लेखन, वीडियो एडिटिंग और साउंड एडिटिंग में भी महारत हासिल है इनको. इसी प्रतिभा को पहचानते हुए इन्हें खबर इंडिया के सहायक संपादक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई हैं.
क्रिएटिव एडीटर
प्रियेश रंजन
प्रियेश रंजन जी इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि से ताल्लुकात रखते है। आप उद्यमी विचारों वाले हैं और हमेशा कुछ नया तथा मौलिक करना पसंद करते हैं। आपने एक बेस्टसेलर उपन्यास दैट्स द लाइफ बेबी लिखा है जो कि फरवरी २०१० को प्रकाशित हुआ है और उसकी १०००० से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। आप पढ़ाकूजोकर डॉट काम (padhakujoker.com) के सह संस्थापक हैं तथा उसके मार्केटिंग एवं मीडिया विभाग के प्रमुख हैं।
अतिथि संपादक
शाहनवाज़ सिद्दीकी
पत्रकारिता से करिअर की शुरुआत की, अभी अभी एक बहुराष्ट्रीय शीतल पेय पदार्थ कंपनी में कार्यरत और विज्ञापन एवं डिजाईन से जुड़े कार्यों का संचालन। समाज से जुड़े हुए मुद्दों तथा व्यंग लेखन में विशेष रुचि है। दैनिक हरी भूमि के लिए नियमित लेखन के साथ-साथ अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित जिसमें मुख्यत: दैनिक जागरण, जनसत्ता, डेली नियुज़ एक्टिविस्ट।
साहित्यिक संपादक
अवनीश सिंह चौहान
अमर उजाला, देशधर्म, डी एल ए, उत्तर केसरी, प्रेस-मेन, नये-पुराने, युग हलचल, यदि, साहित्य दर्पण, परमार्थ, आनंदरेखा, आनंदयुग, कविता कोश डॉट कॉम, सृजनगाथा डॉट कॉम, अनुभूति डाट काम, हिन्द-युग्म डॉट कॉम, रचनाकार, साहित्य शिल्पी, पी4पोएट्री डॉट कॉम, पोयमहण्टर डॉट कॉम, पोएटफ्रीक डॉट कॉम, पोयम्सएबाउट डॉट कॉम, आदि हिन्दी व अंग्रेजी के पत्र-पत्रिकाओं में आलेख, समीक्षाएँ, साक्षात्कार, कहानियाँ, कविताओं एवं नवगीतों का निरंतर प्रकाशन। साप्ताहिक पत्र ‘प्रेस मेन’, भोपाल, म०प्र० के ‘युवा गीतकार अंक’ (30 मई, 2009) तथा ‘मुरादाबाद के प्रतिनिधि रचनाकार’ (2010) में गीत संकलित। मेरी शाइन (आयरलेंड) द्वारा सम्पादित अंग्रेजी कविता संग्रह 'ए स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स' में रचनाएँ संकलित प्रकाशित कृतियाँ: स्वामी विवेकानन्द: सिलेक्ट स्पीचेज, किंग लियर: ए क्रिटिकल स्टडी, स्पीचेज आफ स्वामी विवेकानन्द एण्ड सुभाषचन्द्र बोस: ए कॅम्परेटिव स्टडी, ए क्विन्टेसेन्स आफ इंग्लिश प्रोज (को-आथर), साइलेंस द कोर्ट इज इन सेशन: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर), फंक्शनल स्किल्स इन लैंग्वेज एण्ड लिट्रेचर, ए पैसेज टु इण्डिया: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर)
वेबसाइट poorvabhas.blogspot.com
कार्टूनिस्ट
असीम त्रिवेदी
मुंबई से स्वतंत्र कार्टूनिस्ट हूँ, पिछले कई सालों से कई बड़े मीडिया हाउसेस के लिए कार्टून बना रहा हूँ.
समय समय पर कई समाचार पत्र, पत्रिकाओं और पोर्टलों के लिए लेख भी लिखता रहा हूँ.
फ़िलहाल मायानगरी में लेखन क्षेत्र में सक्रिय हूँ.
अपने कार्टून ब्लॉग ( http://www.aseemtrivedi.blogspot.com/ )
के अलावा एक सामूहिक ब्लॉग दखलंदाज़ी ( http://dakhalandazi.blogspot.com/ ) भी चला रहा हूँ,
साथ ही एक अंतर्राष्ट्रीय कार्टून ब्लॉग वर्ल्ड कार्टूनिस्ट ( http://worldcartoonists.blogspot.com/) के सबसे
सक्रिय भारतीय सदस्यों में से हूँ.
इसके साथ ही साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय रहा हूँ.
काव्य गोष्ठियों और सम्मेलनों में शामिल होता रहा हूँ और कुछ साहित्यिक पत्रिकाओं और अख़बारों में कविता और कहनियों के प्रकाशन का भी सौभाग्य मिला है.
२००७ में दैनिक जागरण ग्रुप द्वारा हिन्दी दिवस पर मेरी कहानी 'कुछ कह रहा है नेपोलियन' को सर्वश्रेष्ठ कहानी भी चुना गया. आजकल पंजाबी पाप संगीत की दुनिया के जाने माने म्यूजिक काम्पोसर सुरिंदर बच्चन जी के साथ कुछ परियोजनाओं पर काम कर रहा हूँ.
फीचर संपादक
अजय कुमार झा
वर्तमान में दिल्ली के जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक के रूप में नियुक्त , अंग्रेजी प्रतिष्ठा के उपरांत , पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा, दिल्ली विश्वविद्यालय से एल एल बी , देश के सभी बढी छोटी पत्र पत्रिकाओं में चार सौ से अधिक सामयिक आलेख, व्यंग्य , कहानी आदि प्रकाशित ।कई पत्रिकाओं के लिए स्तंभ लेखन , एक औन्लाईन उपन्यास "मंदाकिनी" और एक कहानी संग्रह " एक कतरा आसमान " पर कार्यरत
चिट्ठा: ajaykumarjha1973.blogspot.com
अश्वनी शुक्ला
जामनगर ,गुजरात मे जन्मे अश्वनी शुक्ला का बचपन से झुकाव कला और पत्रकारिता से था . तक़रीबन चौदह वर्ष की उम्र में अपने गाँव के प्रति विशेष लगाव के कारण अपने पैतृक निवास बदलापुर जौनपुर आ गए.बदलापुर के सल्तनत बहादुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय से कला संकाय में स्नातक की शिक्षा संपन्न की फिल्म और पत्रकारिता में अपने कैरियर की तलाश में सन २००४ में मुंबई पहुचे तक़रीबन एक वर्ष के संघर्ष के बाद अश्वनी शुक्ला ने मुबई के प्रतिष्ठित जेमिनी स्टूडियो से बतौर फिल्म पत्रकार जुड़े. अपने शुरुवाती दिनों में दूरदर्शन के लिए फ़िल्मी शो से भी जुड़े रहे. जेमिनी स्टूडियो से दुबई स्थित जिओ टी वी के लिए फ़िल्मो पर आधारित शो कुछ गप है कुछ सच है से जुड़े रहे . इसी समयांतराल में इंडिया टी वी के लिए अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर, हेमा मालिनी, शाहरुख़ खान पर लघु फ़िल्मो के निर्माण से भी जुड़े रहे इस दौरान लता मंगेशकर को गायन का प्रथम अवसर देने वाले गुरु दत्ता डावजेकर , निर्माता निर्देशक शक्ति सामंत , आशा भोसले , संगीत निर्देशक खैय्याम , प्यारेलाल , आनंद भाई (कल्यानजी ) , अमिताभ बच्चन, देव आनंद , हेमा मालिनी, धर्मेन्द्र, जैसे कई दिग्गज फिल्म व्याक्तिव से साक्षात्कार का अवसर मिला .२००९ में जेमिनी स्टूडियो की फिल्म जोर लगा के हैय्या के लिए मार्केटिंग और प्रचार किया.
दिल्ली ब्य़ूरो
अनिल कुमार
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटा जिला- अमरोहा से हुं। और इस समय दिल्ली विश्विद्यालय से बी० ए० आखरी वर्ष की पढाई कर रहा हुं। लगभग एक साल से वेब मीडिया से जुडा हुं। मैं लोगो के व्यावहार को देखते हुये, "मै नही सोचता कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं" महान न्युटन की इस लाईन से बहुत ज्यादा प्रभावित हुं। मैरी खोजी प्रकृति मेरी आदत बन गयी, जानकारियां हासिल कर उनपर लिखना मेरा शौक बन गया और अलग लिखना मेरा होसला बुलन्द करता है। तर्क पूर्ण लेख लिखने का जुनून हैं और कभी-कभी कवितायें भी लिख लेता हुं।
हालिया में एक अंग्रेजी उपन्यास लिख रहा हु और नये गम्भीर विषयों पर काम कर रहा हुं। बचपन में मार्गदर्शन के अभाव ने मुझे कम उम्र में बडो की तरह सोचने पर मजबूर किया। इस बडे शहर में आना मेरा सौभाग्य था। अब इसको कामयाबी का रूप देना मेरा धर्म।
विशेष संवाददाता (अंतर्राष्ट्रीय)
रेखा राजवंशी
लेखिका, कवयित्री व रेडियो कलाकार रेखा राजवंशी ने स्नातक स्तर तक हिन्दी व अंग्रेज़ी का अध्ययन
किया । मनोविज्ञान और शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की, स्पेशल एडुकेशन में मक्वारी यूनिवर्सिटी सिडनी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया । भारत में बी एड तथा टीचर ट्रेनिंग में अध्यापन किया, अब सिडनी में हाई स्कूल टीचर हैं । सप्ताहांत में हाई स्कूल के बच्चों को हिन्दी पढ़ाने के होने के साथ-साथ सिडनी विश्वविद्यालय में प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत हिन्दी पढ़ाती हैं ।
दिल्ली में आल इंडिया रेडियो के नाटक, बाल और महिला विभाग की कलाकार, दूरदर्शन के लिए स्क्रिप्ट लेखन और वोइस ओवर किया । सिडनी में एस बी एस रेडियो में सात साल से कार्यक्रम योगदान देती रही है । इसके अतिरिक्त सिडनी, मेलबर्न, केनबरा और वूलून्गोंग शहर में काव्य पाठ किया है ।
राम कृष्ण खुराना 11 फरवरी 1948 का दिन वह दिन था जब मैंने अपनी ममतामयी मां की गोद में पहली किलकारी भरी थी ! इस संसार को छोडने के पश्चात भी नाम चलता रहे यह इच्छा बचपन से ही रही है ! इस तृप्ति की पूर्ति भी लेखक-जीवन में अनुभव करता हूं ! पहली रचना (एक सत्य कथा) 1970 में दैनिक हिन्दुस्तान, दिल्ली में प्रकाशित हुई !
इसके पश्चात मेरी लगभग 70 रचनांए सारिका, रविवार, मिलिन्द, चुलबुला, कहानीकार, एकांत, नवभारत टाईम्स, हिन्दुस्तान, दैनिक ट्रिब्यून, विनीत, अरा सृष्टि, स्वर्णिम प्रकाश, युगेन्द्र, वीर अर्जुन, पंजाब केसरी, वीर प्रताप, शिवालिक सन्देश तथा पब्लिक सिंडीकेट द्वारा कई लब्ध प्रतिष्ठ पत्र-पत्रिकायों में प्रकाशित हो चुकी हैं ! कई रचनांए कहानी व लघुकथा संस्करणों में प्रकाशित ! तीन रचनांए आकाशवाणी (आल ईंडिया रेडियो) से प्रसारित हो चुकी हैं ! कई रचनांए पुरस्कृत !
दैनिक जागरण के मंच – जागरण जंक्शन द्वारा प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त ! जागरण जंक्शन द्वारा ही सर्वोत्तम लेखन के लिए "हाल आफ फेम" में चयनित !
बिहार ब्यूरो
नवल किशोर बिहार वैसे भी अनोखी प्रतिभाओं के लिए विख्यात हैं और नवल किशोर कुमार जी भी ऐसी ही बहुमुखी प्रतिभाओं में शुमार होते हैं। तीस वर्षीय नवल जी ने अपने पत्रकारिय कॅरिअर में सन्मार्ग, ब्यूल्ड इंडिया पत्रिका सहित अनेक प्रतिष्ठित मीडिया हाउसों में पत्रकारिता का गौरव बढ़ाया है। वर्तमान में बिहार की एक अग्रणी वेबसाईट की सारी जिम्मेदारी संभाल रहे नवल जी खबर इंडिया के लिए भी कुछ सार्थक कर गुजरना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश ब्यूरो
मिथिलेश दुबे काशी और प्रयाग के मध्य स्थित कालीन नगरी भदोही (संत रविदास नगर) के छोट से गांव में जन्म। स्नातक तक की पढ़ाई भदोही से। स्नातक पुरा करने के बाद नोयडा से कम्प्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग में डिग्री। इस दौरान ब्लागिंग से वास्ता, विभिन्न वेब र्पोटल के लिए लिखना शुरु किया। कारवां बढ़ता गया, ब्लागिंग से इतर प्रिंट मीडिया के तरफ रूख। देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में फ्री लांसर की भूमिका के साथ-साथ लखनऊ से प्रकाशित एक साप्ताहिक अखबार में कार्यरत साथ ही पत्रकारिता में अध्ययनरत्न। इस बीच दैनिक प्रभात मेरठ में लगभग एक साल तक का अनुभव। इसके साथ-साथ www.upkhabar.in, www.hindisahityamanch.com, वेब पोर्टल का संचालन ।
छिंदवाड़ा ब्यूरो
प्रभुदयाल श्रीवास्तव शिक्षा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पत्रोपाधि कार्य सेवा निवृत कार्यपालन यंत्री रुचि व्यंग्यकार, बाल साहित्यकार बुंदेली साहित्य कवि लघुकथाकार देश के लगभग सभी बड़े छोटे समाचार पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन, लोकमत समाचार नागपुर में तीन साल तक व्यंग्य स्तंभ|
निमाड़ क्षेत्र प्रभारी
चंद्रकांत सोनी खरगोन में फाइनेंस के क्षेत्र में एक बड़ा नाम, लेकिन मीडिया में भी उतनी ही दिलचस्पी. चंद्रकांत सोनी ने 2006 में मीडिया का स्वाद पहली दफा तब चखा, जब दैनिक जागरण अखबार की खरगोन जिले की ब्यूरोचीफ ली. अनुभव बेहद खराब रहा और समूह ने लाखों के गड्ढे में उतार दिया. फिर भी मीडिया में कुछ कर गुजरने का जज्बा है, सो अब खबर इंडिया के लिए खरगोन जिले की एक्सक्लूसिव और समाजोपयोगी खबरें देने का जिम्मा लिया है.