साहित्य / गजलें
यूं सम्बंध बड़े गहरे हैं
2012-05-25 08:53 AM को गजलें पर प्रकाशित
यूं सम्बंध बड़े गहरे हैं
बस लोगों के दो चेहरे हैं|
बाहर तो भरपूर उजाला
पर भीतर तम के पहरे हैं|
बहुत प्रेम से दिये आपने
अब तक सारे घाव हरे हैं|…
[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]
[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]
घर अपना ही घर होता है
2012-05-25 08:52 AM को गजलें पर प्रकाशित
घर अपना ही घर होता है
वैसा कहां किधर होता है|
शुद्ध हवा पानी मिल जाये
ऐसा कहाँ शहर होता है|
लाख बार धो धो कर देखो
फिर भी जहर जहर होता…
[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]
[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]
आज बेबस हुये सरकार क्यों रफ्ता रफ्ता
2011-12-24 12:57 PM को गजलें पर प्रकाशित
बढ़ गई आपकी रफ्तार क्यों रफ्ता रफ्ता
हाथ में ले लिये अधिकार क्यों रफ्ता रफ्ता|
जहां वाजिब था कि जाकर सभी ,मत्था टेकें
वहां पहुंचे हैं गुनहगार क्यों रफ्ता रफ्ता|
मेरे …
[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]
[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]
मिलके भी नहीं मिलते
2011-09-07 01:54 PM को गजलें पर प्रकाशित
वो मिलते हैं ऐसे कि, मिलके भी नहीं मिलते
वो फूल हैं ऐसे कि, खिलके भी नहीं खिलते
हम कहते हैं उनसे पहलू में मेरे आओ
उनके तो कदमों…
[ लेखक : लीला तिवानी ]
[ लेखक : लीला तिवानी ]
मुझे कुछ तुमसे कहना है
2011-08-29 11:55 AM को गजलें पर प्रकाशित
अगर तुम प्यार से सुनलो मुझे कुछ तुमसे कहना है
बढ़ा है दर्दे-दिल इतना नहीं अब और सहना है-
1.कभी…
[ लेखक : लीला तिवानी ]
[ लेखक : लीला तिवानी ]
