भारत का नया कानूनी युग: व्यवसाय सुगमता, एमएसई पुनर्जीवन और निवेश-अनुकूल सुधारों की दिशा में निर्णायक कदम

नवंबर 26, 2025 - 11:27
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भारत का नया कानूनी युग: व्यवसाय सुगमता, एमएसई पुनर्जीवन और निवेश-अनुकूल सुधारों की दिशा में निर्णायक कदम

 

दिनांक: २५ नवम्बर, २०२५ - भारत के कानूनी एवं नियामक ढांचे में तेजी से परिवर्तन जारी है। अब सुधारों का मुख्य केंद्र व्यापार करने में आसानी, त्वरित वाद निस्तारण और M&A-अनुकूल वातावरण है।

भारत का कानूनी परिदृश्य: व्यवसाय सशक्तिकरण, एमएसएमई पुनर्जीवन और जिम्मेदार पूंजी को प्रोत्साहन कार्यक्रम से पहले आयोजित मीडिया संवाद में एयू कॉर्पोरेट एडवाइज़री एंड लीगल सर्विसेज़ के संस्थापक श्री अक्षत खेतान ने उद्यमिता, निवेश और आर्थिक विकास में चल रहे कानूनी सुधारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

व्यापार वृद्धि का सशक्त कानूनी आधार

श्री खेतान ने कहा,

आज कानून अड़चन नहीं, बल्कि व्यवसाय का समर्थ साझेदार है। पारदर्शी, पूर्वानुमेय और बिजनेस-फ्रेंडली कानूनी व्यवस्था हमारा संकल्प है।

कॉर्पोरेट प्रशासन, डिजिटल अनुपालन और वैश्विक निवेश को सुगम बनाने वाली नीतियाँ भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी बना रही हैं।

 

एमएसएमईड: अर्थव्यवस्था की रीढ़

मुख्य सुधार बिंदु:

एमएसएमईडी अधिनियम के तहत भुगतान में देरी पर कड़ी कार्रवाई
एमएसई फे़सिलिटेशन काउंसिल्स एमएसएमई समाधान से त्वरित विवाद समाधान
• IBC
के PPIRP ढाँचे से एमएसएमई पुनर्जीवन को गति
एमएसएमई विस्तार के लिए विलय एवं अधिग्रहण लेनदेन को सरल समर्थन

इन कदमों का उद्देश्य एमएसएम को लचीला, प्रतिस्पर्धी और निवेश-सक्षम बनाना है।

IBC: समाधान और पुनर्जीवन पर केंद्रित

सक्रांत परिसंपत्तियों के समाधान की प्रक्रिया काफी तेज
निवेशकों के लिए विश्वसनीय और पारदर्शी प्रणाली
विलय एवं अधिग्रहण -आधारित Revival की अधिक संभावनाएँ
एमएसएमई के लिए कम व्यवधान वाला पुनर्गठन मॉडल

“IBC केवल लिक्विडेशन नहीं यह ईमानदार व्यवसायों को बचाने की प्रक्रिया है,” — श्री खेतान

अपराधीकरण में कमी एवं डिजिटल न्याय

छोटी तकनीकी चूकों पर जेल की जगह आर्थिक दंड,
-कोर्ट्स फेज-III से वर्चुअल सुनवाई, -फाइलिंग, ऑनलाइन केस सूचना
इनसे न्याय प्रक्रिया तेज़, सुलभ और दक्ष बनी है।

 

एक सुरक्षित, निवेश-सक्षम भारत की दिशा में

समापन में श्री खेतान ने कहा:

कानून को वृद्धि का सहयोगी बनाना ही हमारा लक्ष्य है एमएसएमई संरक्षण, IBC मजबूती विलय एवं अधिग्रहण

सुगमता और डिजिटल न्याय व्यवस्था इसी दृष्टि का हिस्सा है।

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