कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX) और गोवा पुलिस ने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए लॉन्च किया ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ कैंपेन

फ़रवरी 19, 2026 - 12:25
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कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX) और गोवा पुलिस ने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए लॉन्च किया ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ कैंपेन

भारत, 17 फरवरी 2026: भारत का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX), जिसे ‘भारत के क्रिप्टो कोच’ के रूप में भी जाना जाता है, ने गोवा पुलिस के साथ गठबंधन किया है। दोनों ने मिलकर ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ (साइबर सुरक्षित गोवा) अभियान शुरू किया है। यह निवेशकों को जागरूक करने की कंपनी की कोशिशों का एक अहम हिस्सा है, जो देश भर में डिजिटल जागरूकता और सुरक्षा को मजबूत करने के उनके लगातार वादे को और पुख्ता करता है।

भारत के क्रिप्टो कोच होने के नाते, कॉइनडीसीएक्स ने हमेशा जिम्मेदारी के साथ क्रिप्टो अपनाने और निवेशकों को जागरूक करने पर जोर दिया है। प्लेटफॉर्म ने हमेशा जानकार और सतर्क डिजिटल यूजर्स तैयार करने की जिम्मेदारी ली है। ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ इसी बड़े मिशन का हिस्सा है, जो अब सिर्फ क्रिप्टो तक सीमित नहीं है। ऐसे समय में जब देश में ऑनलाइन खतरे बढ़ रहे हैं, यह कैंपेन साइबर सुरक्षा और डिजिटल साफ-सफाई (डिजिटल हाइजीन) के बड़े दायरे तक पहुँच रहा है।

इस जन-जागरूकता पहल का मकसद गोवा कार्निवल हफ्ते के दौरान नागरिकों के बीच साइबर सुरक्षा और डिजिटल मजबूती को बढ़ाना है।

13 से 17 फरवरी 2026 तक चलने वाला यह अभियान गोवा कार्निवल के जोश और भीड़ का फायदा उठाते हुए लोगों तक एक जरूरी मैसेज पहुँचा रहा है। संदेश यह है कि जैसे-जैसे भारत में डिजिटल कामकाज बढ़ रहा है, साइबर सुरक्षा को भी हमें अपनी रोजमर्रा की आदत बनाना होगा।

यह पहल लोगों को जागरूक बनाकर उन्हें मजबूत करने के साझा मकसद पर टिकी है। इसका लक्ष्य नागरिकों को ऐसी आसान और काम आने वाली जानकारी देना है, जिससे वे ऑनलाइन धोखाधड़ी, पहचान की चोरी (आईडेंटिटी थेफ्ट), फिशिंग, अकाउंट हैकिंग, साइबर बुलिंग और बढ़ते डिजिटल खतरों से खुद को बचा सकें। कैंपेन का मुख्य संदेश साफ है—साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी डराने वाली या बहुत ज्यादा तकनीकी नहीं होनी चाहिए। यह ऐसी होनी चाहिए जिसे आम इंसान समझ सके और सीधे अमल में ला सके।

‘साइबर सुरक्षित गोएम’ की सबसे खास बात है “विजिलेंस फ्लोट” की शुरुआत। यह एक चलता-फिरता मोबाइल क्लासरूम है, जो गोवा के कार्निवल रास्तों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से गुजरेगा। इसे किसी प्रचार के मंच के रूप में नहीं, बल्कि सीखने की एक आसान जगह के रूप में बनाया गया है। यह फ्लोट डिजिटल हाइजीन को सरल, मजेदार और यादगार तरीके से समझाएगा, जो कार्निवल के माहौल के हिसाब से फिट बैठता है। यहाँ नागरिकों को साइबर सुरक्षा के छोटे-छोटे सबक, क्या करें और क्या न करें वाली बातें और असली उदाहरणों के जरिए बताया जाएगा कि ठगी कैसे होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

कैंपेन एक साफ और सीधा संदेश देता है: “घबराएं नहीं।”

साइबर अपराधी अक्सर लोगों के डर, जल्दबाजी और कन्फ्यूजन का फायदा उठाते हैं। ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ नागरिकों को शांति बनाए रखने और तुरंत 1930 जैसी साइबर-क्राइम हेल्पलाइन और नेशनल पोर्टल cybercrime.gov.in के जरिए सरकारी मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह पहल “अब आगे क्या करें” के बारे में आसान और साफ जानकारी देती है। साथ ही यह भरोसा भी दिलाती है कि साइबर अपराध किसी के साथ भी हो सकता है, लेकिन इससे बाहर निकलने और खुद को सुरक्षित करने के रास्ते मौजूद हैं।

कार्निवल के कार्यक्रमों के अलावा इस अभियान के असर को और बढ़ाने के लिए, एक डिजिटल रिसोर्स हब भी बनाया गया है। नागरिक कार्निवल के दौरान बांटे जाने वाले क्‍यूआर कोड को स्कैन करके इसे देख सकते हैं। इन क्‍यूआर कोड के जरिए लोग पढ़ाई की सामग्री, मदद के लिए जरूरी चेकलिस्ट और सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप्स जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं—ताकि सिर्फ जानकारी ही न मिले, बल्कि लोग हर खतरे के लिए पहले से तैयार भी रहें।

इस पहल में युवाओं और परिवारों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। इसके तहत साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग और डिजिटल शोषण जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाई जाएगी। इन संवेदनशील मुद्दों को समझदारी और हमदर्दी के साथ पेश करते हुए, इस पहल का मकसद पेरेंट्स और युवाओं को उन संकेतों को पहचानने में मदद करना है जो खतरे की शुरुआत हो सकते हैं, ताकि वे समय रहते बचाव के कदम उठा सकें।

इस साझेदारी पर कॉइनडीसीएक्स के चीफ मार्केटिंग एंड ग्रोथ ऑफिसर, प्रशांत वर्मा ने कहा, “आज के समय में साइबर सुरक्षा कोई पसंद नहीं है, बल्कि डिजिटल इकोनॉमी में हिस्सा लेने के लिए यह सबसे बुनियादी जरूरत है। ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ के जरिए हमारा लक्ष्य वहां जागरूकता पहुंचाना है, जहां इसका सबसे ज्यादा असर हो—यानी जमीनी स्तर पर, समाज के बीच और उन लोगों तक जो रोज इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। गोवा कार्निवल जश्न और साथ आने का प्रतीक है, और हम इसे एक बड़े मंच के रूप में देखते हैं, जहां यह जरूरी संदेश दिया जा सके कि डिजिटल सुरक्षा हमारी रोजमर्रा की सुरक्षा का ही एक हिस्सा है।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत के क्रिप्टो कोच के रूप में कॉइनडीसीएक्स का मानना है कि किसी भी नई तकनीक को अपनाने के साथ-साथ शिक्षा और जिम्मेदारी का होना बहुत जरूरी है। यह पहल देश को डिजिटल रूप से जागरूक बनाने के हमारे लगातार वादे का हिस्सा है। हमने हमेशा यूजर्स को शिक्षित करने में निवेश किया है, और इस तरह के सहयोग के जरिए हम अपनी जिम्मेदारी को अपने प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाकर पूरे समाज तक ले जा रहे हैं।”

गोवा पुलिस के एसपी (साइबर क्राइम), श्री राहुल गुप्ता (IPS) ने कहा, “साइबर अपराध लगातार नए रूप ले रहा है, और उससे बचने के लिए लोगों का जागरूक होना ही हमारा सबसे मजबूत हथियार है। ‘साइबर सुरक्षित गोएम’ के जरिए हमारा मकसद नागरिकों तक सरल और आसानी से समझ आने वाले तरीके से पहुंचना है, ताकि वे अपनी, अपने परिवार की और अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा सकें।”

‘साइबर सुरक्षित गोएम’ के जरिए कॉइनडीसीएक्स और गोवा पुलिस ने दिखाया है कि जब सरकारी संस्थाएं और प्राइवेट कंपनियां साथ मिलकर काम करती हैं, तो समाज में बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। कार्निवल की खुशियों के बीच यह अभियान एक अहम राष्ट्रीय प्राथमिकता को दोहराता है: साइबर सुरक्षा को सिर्फ किसी हादसे के बाद याद न किया जाए, बल्कि इसे अपनी जीवनशैली और रोजमर्रा की संस्कृति का हिस्सा बनाया जाए।

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