*राजस्थान में आस्था का भव्य प्रतीक बना 131 फीट ऊंचा हनुमान स्वरूप, रामनवमी पर हुआ दिव्य लोकार्पण*

मार्च 26, 2026 - 12:32
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*राजस्थान में आस्था का भव्य प्रतीक बना 131 फीट ऊंचा हनुमान स्वरूप, रामनवमी पर हुआ दिव्य लोकार्पण*

* 500 फीट ऊंचाई पर स्थापित, 30 किमी दूर से दृश्य, 150 टन वजनी संरचना | 115 टन स्टील, 40 टन फाइबरग्लास से निर्मित दिव्य प्रतिमा

*नाथद्वारा (राजसमंद), राजस्थान, २६ मार्च-२०२६:* रामनवमी के पावन अवसर पर नाथद्वारा के गिरिराज पर्वत पर स्थापित 131 फीट ऊंची हनुमानजी की भव्य प्रतिमा ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ का दिव्य लोकार्पण समारोह अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच सम्पन्न हुआ। समुद्र तल से लगभग 500 फीट की ऊंचाई पर स्थापित यह प्रतिमा करीब 30 किलोमीटर दूर से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो इसे राजस्थान में आस्था का नया केंद्र बनाती है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और हजारों भक्तों की उपस्थिति ने समारोह को भव्य बना दिया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

गिरिराज पर्वत पर स्थापित यह दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा प्रणाम मुद्रा में प्रभु श्रीनाथजी और सामने स्थित 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ की ओर निहारती हुई बनाई गई है। यह संरचना भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक एकता का अद्वितीय प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिणमुखी हनुमानजी को विशेष रूप से रक्षक और अत्यंत फलदायी माना जाता है।

*एस.एम.बी. कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीईओ एवं इस प्रतिमा के निर्माणकर्ता श्री गिरीशभाई रतिलाल शाह ने कहा* ,"यह प्रतिमा केवल एक भव्य संरचना नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। हमारा उद्देश्य एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र विकसित करना था, जो लोगों को अपनी संस्कृति और भक्ति से जोड़ सके। यह संकल्प गुरुओं के आशीर्वाद, निरंतर साधना और सामूहिक प्रयास से साकार हुआ है। हमें विश्वास है कि ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि नाथद्वारा को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाएगा।"

इस प्रतिमा का निर्माण एक मजबूत एम् 30 ग्रेड आरसीसी बेस पर किया गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 20 फीट है, जबकि स्वयं प्रतिमा 111 फीट ऊंची है। कुल मिलाकर इसकी ऊंचाई 131 फीट है, जो इसे लगभग 13 मंजिला इमारत के बराबर बनाती है। निर्माण में करीब 115 टन स्टील और 40 टन फाइबरग्लास का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी मजबूती और बारीक कलात्मकता सुनिश्चित होती है।

प्रतिमा की विशेष सुनहरी आभा को बनाए रखने के लिए थाईलैंड से विशेष गोल्डन कोटिंग मंगाई गई है। लगभग 150 टन वजनी इस संरचना के निर्माण के दौरान तीन वर्षों तक प्रतिदिन सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिससे इस परियोजना को आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जोड़ा गया।

इस भव्य प्रतिमा के शिल्पकार नरेश कुमावत हैं, जो देश-विदेश में 6000 से अधिक मूर्तियों का निर्माण कर चुके हैं। उन्होंने कनाडा सहित कई देशों में विशाल प्रतिमाएं स्थापित की हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, तेज हवाओं और ऊंचाई के कारण निर्माण कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा। पहाड़ी क्षेत्र में हवा का दबाव इतना अधिक था कि क्रेन को स्थिर रखना भी कठिन हो जाता था, बावजूद इसके आधुनिक तकनीक और सुदृढ़ इंजीनियरिंग के साथ इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब प्रभु श्रीनाथजी व्रज से मेवाड़ पधारे, तब अन्य देवी-देवता भी उनकी सेवा हेतु साथ आए। इसी आस्था के आधार पर हनुमानजी की यह प्रतिमा नाथद्वारा में स्थापित की गई है, जो क्षेत्र की धार्मिक विरासत को और सशक्त बनाती है।

नाथद्वारा में पहले से स्थापित 369 फीट ऊंची ‘विश्वास स्वरूपम’ शिव प्रतिमा के साथ यह हनुमान प्रतिमा क्षेत्र को एक प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन को भी नई गति प्रदान करेगी।

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