ग्लेनेईगल्स अस्पताल और बॉम्बे अस्पताल इंदौर ने इंदौर में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा के लिए हाथ मिलाया।

मार्च 18, 2026 - 14:32
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ग्लेनेईगल्स अस्पताल और बॉम्बे अस्पताल इंदौर ने इंदौर में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा के लिए हाथ मिलाया।


यह ओपीडी सेवा इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।इसमें स्प्लिट लीवर ट्रांसप्लांट, एबीओ-इनकम्पैटिबल लिविंग डोनर लीवर ट्रांसप्लांट (एबीओ -एलडीएलटी), डीसिज़्ड डोनर लीवर ट्रांसप्लांट (डीडीएलटी), रोबोटिक लीवर ट्रांसप्लांट और बच्चों के लिए लीवर ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत प्रक्रियाएं शामिल हैं।
पश्चिम भारत में १००० से अधिक लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक करने के बाद ग्लेनेईगल्स अस्पताल की यह पहल इंदौर और पूरे मध्य भारत के मरीजों के लिए उन्नत जांच और लीवर ट्रांसप्लांट इलाज को अधिक आसान और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इंदौर:- ग्लेनेईगल्स अस्पताल ने बॉम्बे अस्पताल इंदौर के साथ मिलकर एक लिवर ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू की हैं। इंदौर के आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को लिवर संबंधी जाचं और ट्रांसप्लांट की सुविधा देना इसका उद्देश हैं। इससे मरीजों को लंबी दूरी तय कर बड़े शहरों में इलाज के जाने की जरूरत नही पडेगी। इस ओपीडी के माध्यम से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस और लिवर इंफेक्शन जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों को अनुभवी डॉक्टरों से समय पर जांच और सही सलाह मिल सकेगी।
ग्लेनईगल्स हॉस्पिटल का लीवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम कई उन्नत प्रक्रियाओं को शामिल करता है, जैसे स्प्लिट लीवर ट्रांसप्लांट, ABO-इनकम्पैटिबल लिविंग डोनर लीवर ट्रांसप्लांट (ABO-LDLT), डीसिज़्ड डोनर लीवर ट्रांसप्लांट(DDLT), रोबोटिक सहायता से किया जाने वाला लीवर ट्रांसप्लांट और बच्चों के लिए लीवर ट्रांसप्लांट। ग्लेनेईगल्स अस्पातल ने पश्चिम भारत में 1000 से अधिक लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं और देश के अन्य प्रमुख अस्पतालों के साथ सहयोग करके उन्नत ट्रांसप्लांट सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ा रहा है।
आजकल देश में लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, अनहेल्दी खानपान, ज्यादा शराब का सेवन, मोटापा, डायबिटीज और हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरल संक्रमण हैं। आम लिवर बीमारियों में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस ए, बी और सी, लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर और लिवर फेल्योर शामिल हैं। अक्सर लोग लिवर की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे कि लगातार थकान रहना, पेट में भारीपन या दर्द, भूख कम लगना, उल्टी जैसा महसूस होना, पेट या पैरों में सूजन आना, और त्वचा या आंखों का पीला पड़ना। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और आगे चलकर लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। इसलिए समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी है।
ग्लेनेईगल्स अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट डायरेक्टर डॉ. अनुराग श्रीमल ने कहां, “आज लीवर ट्रांसप्लांट कई मरीजों के लिए, जो एंड-स्टेज लीवर डिज़ीज और अन्य गंभीर लीवर बीमारियों से पीड़ित हैं, जीवन का दूसरा मौका देता है। सर्जरी और ट्रांसप्लांट चिकित्सा में हुई प्रगति के कारण अब हम कई प्रकार के ट्रांसप्लांट विकल्प उपलब्ध करा पा रहे हैं, जैसे लिविंग डोनर लीवर ट्रांसप्लांट, एबीओ-इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट, स्प्लिट लीवर ट्रांसप्लांट, बच्चों के लिए लीवर ट्रांसप्लांट और रोबोटिक सहायता से किए जाने वाले ट्रांसप्लांट।
बॉम्बे हॉस्पिटल, इंदौर के साथ इस सहयोग के माध्यम से हमारा उद्देश्य मध्य भारत के मरीजों के लिए विशेषज्ञ सलाह और सही मार्गदर्शन को अधिक आसान बनाना है। मरीज इंदौर में ही अपनी जांच और परामर्श करा सकते हैं और अगर किसी मरीज को एडवांस इलाज या लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होगी, तो उन्हें मुंबई के ग्लेनेईगल्स अस्पताल में भेजा जा सकता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।”
ग्लेनेईगल्स अस्पताल के सीईओ डॉ. बिपिन चेवाले ने कहॉं, “मरीजों को समय पर इलाज मिलना चाहिए यह हमारा उद्देश हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ग्लेनेईगल्स अस्पताल ने इंदौर के बॉम्बे अस्पताल के साथ मिलकर एक लिवर ओपीडी सुविधा शुरू की हैं। दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों को मिलाकर हम कोशिश करेंगे कि लिवर की बीमारियों की जल्दी पहचान हो, समय पर इलाज मिले और मरीजों को पूरे इलाज के दौरान सही सहयोग मिल सके। यह पहल इंदौर और आसपास के लोगों के लिए लिवर के बेहतर इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
इंदौर स्थित बॉम्बे अस्पताल के डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने कहां, इस सहयोग से मरीजों को लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन (एलडीएलटी) और डीसीज्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन(डीडीएलटी) की सुविधा इंदौर में ही उपलब्ध होगी। इससे जरूरतमंद मरीजों को एक ही जगह पर जांच और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया कराने में सुविधा होगी और इलाज का खर्च भी कम रहेगा। इससे मरीजों और उनके परिवारों को बड़े शहरों में इलाज कराने के अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलेगी।

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