कब पकड़े जाते हैं बड़े चोर

2012-08-18 01:35 PM को विचार पर प्रकाशित

 

 
हमने आज एक समाचार का शीर्षक पढ़ा "रामलीला में चोरों की चांदी''. हमारा तो दिमाग ही चकरा गया. हमने सोचा कि, आज तो रासलीला का दिन है, इन दिनों रामलीला में चोरों की चांदी कैसे हो गई! यों तो चोरों की चांदी हर दिन, हर जगह होती है, चाहे कोई भी मौसम हो, या कोई भी स्थान यानी कि धार्मिक स्थल हो श्मशान घाट, चोरों की चांदी का धंधा मंदा नहीं होता, उसे तो बस अवसर मिलना चाहिए.
ख़ैर हमने जब समाचार पढ़ा तो, लगा कि "खोदा पहाड़, निकली चुहिया''. लिखा था, "योग गुरु बाबा रामदेव के अनशन स्थल रामलीला मैदान में गुरुवार को मोबाइल चोर काफी सक्रिय रहे. अनशन स्थल से 50 से ज्यादा मोबाइल गायब होने की सूचना मिली है.करीब चार पांच लोगों ने मिलकर ये चोरियां कीं जिन्हें स्वयंसेवकों ने पकड़ भी लिया, लेकिन बाबा रामदेव ने उन्हें छुड़वा दिया. रामदेव ने विदेशों में काला धन जमा रखने वालों का जिक्र करते हुए कहा कि इन लोगों को हल्का-फुल्का दंड दीजिए. बड़े चोरों को पकड़िए. स्वयंसेवकों ने बताया कि गुरुवार की सुबह अनशन शुरू होने के बाद लगभग 50 मोबाइल लापता होने की सूचना मिली थी जिसके बाद वे सक्रिय हुए और चोर पकड़ लिए गए.'' कोई उन चोरों से पूछे कि," भई, अब तो सरकार सारे गरीबों को मोबाइल दिलाने वाली है न! अब मोबाइल चुराने से क्या फ़ायदा, बस अपना नाम गरीबों की सूची में दर्ज़ कराइए और ठाठ से 200 रूपये का टॉक टाइम पाइए और मुफ़्त कॉलों का लुत्फ़ उठाइए.
अब देखें, कब पकड़े जाते हैं बड़े चोर. 
लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी

शिक्षा हिंदी में स्नातकोत्तर, बी.एड., एम.एड., कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड । दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत । हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित ‌। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

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