सच्ची कयें तो संसद तो भारत माता है
जे भैयाजू संसद खों सर्वोच्च बता रये
अंदरा पीस रये हैं कुत्ता आटो खा रये|
जहां जगा मिलवो चईयेती इंसाननखों
ऊ आसन पे गुंडा डाकू चोर दिखा रये|
गैयां बछियां भैंस बकरयों कॊ सब चारो
संसद के चरवाहे ससुरे खुदई चबा गये|
मेलो कुर्ता चिकटी धोती पेरकें बैठे
फिर काये ऐसी संसद खों सुद्ध बता रये|
सुद्ध हतीं अबलो गंगाजू निरमल निरमल
नहा नहा कें सब पानी मैलो करवा रये|
मार मार कें ठूसा उनखों अबई भगाओ
जो अपनी भारत माँ खों बदनाम करा रये|
सच्ची कयें तो संसद तो भारत माता है
उते बैठकें काये दागी दाग लगा रये|
