घर अपना ही घर होता है
2012-05-25 08:52 AM को गजलें पर प्रकाशित
घर अपना ही घर होता है
वैसा कहां किधर होता है|
वैसा कहां किधर होता है|
शुद्ध हवा पानी मिल जाये
ऐसा कहाँ शहर होता है|
ऐसा कहाँ शहर होता है|
लाख बार धो धो कर देखो
फिर भी जहर जहर होता है|
फिर भी जहर जहर होता है|
चापलूस और मक्कारों का
अक्सर मीठा स्वर होता है|
अक्सर मीठा स्वर होता है|
रब ने जिसे बनाया होगा
वही वधु का वर होता है|
वही वधु का वर होता है|
