सहायता और धन्यवाद

2012-04-16 09:28 AM को व्यंग्य पर प्रकाशित

 

मेरे मित्र भरोसे का छोरा शहर में नौकरी पर लग गया | नौकरी क्या लगी उस की तो चल ढल तो बदली ही अपितु हव भाव भी बदल गये और यहाँ तक की उस का हुलिया तक बदल गया | शहर जाने से पहले जो भी कोई उसे मिल जाता वह सब का राम २ कह कर अभिवादन करता था | भरोसे लाल के मन को बड़ा चैन मिलता था कि बेटा भी तो मेरा ही है और अड़ोसी पडौसी भी अपने बच्चों को उस का उदाहरन देते थे कि देखो भरोसेलाल के लडके को कितना सीधा और सरल है , सब का सम्मान करता है और जो दे दो फन लेता है या जैसा दे दो खा लेता है |परन्तु जब से  नौकरी क्या लगा है बस पूछो मत |
नौकरी लगने के बाद उस ने बताया कि उसे कुछ दिन शहर में ही रहना पड़ेगा क्यों कि वहाँ उसे बोलना चलना , उठाना बैठना आदि बातें सिखायेंगे | भरोसे लाल के मन में तभी से कुछ शंका सी होने लगी कि इतने अच्छे लडके को भला वे क्या सिखायेंगे | इसे तो मैंने पूरा व्ह्व्हार सिखाया है कि सब का सम्मान करो , अपने घर आने पर सब का आदर सत्कार करो और सब से सम्मान पूर्वक बोलो | अब पता नही उसे वे क्या नई बात सिखायेंगे क्यों कि व्यवहार में तो वह पूरे गाँव के लिए एक उदाहरन है परन्तु नौकरी की बात थी कि चलो चार पैसे की जरूरत पडती ही रहती है और नौकरी लग गया है तो और भी ख़ुशी की बात है खेती में किसान को मिलता ही क्या है फसल पर भाव गिर दिया जाता है और बाद में किसन को ही वही चीज चौगुमने दम पर खरीदनी पडती है पर शहर में जा कर चलो कुछ तो सीखेगा ही जैसे प्रसादी का लड़का अब चुन से आता कहने लगा है तो सारा गाँव उसे पढ़ा लिखा मानने लगा है बेशक उस के मेरे लडके से हमेशा नम्बर कम ही आते हैं |
चलो पांच सात दिन की ही तो बात है नौकरी पक्की हो गई तो शाम को तो घर आ ही जाये करेगा , कोई बात नही है |लड़का होनहार था ही जल्दी ही प्रशिक्षण  पूरा कर लिया परन्तु भरोसे लाल का सपना भी जल्दी ही टूट गया क्योंकि उस ने शहर से आते ही भरोसे लाल को गुड इवनिंग बोला | यह बात सुन कर भरोसे लाल अवाक् रह गया कि कहाँ तो बेटा आते ही पैर छोटा था और राम २ करता था और आज पता नही क्या बोल रहा है न रामा  न कृष्णा  | यह तो शहर में दो चार दिन रह कर ही कुछ सिखने बजाय जो आता था उसे भी भूल गया लगता है | उस ने लडके को बड़े आराम से समझाया कि बेटे बड़ों का आदर जैसे पहले करते थे वैसे ही किया करो | लडके ने खा किया तो है बापू , अब आप को पता नही कि मैं शहर से बोलचाल की ही तो भाषा सिख कर आया हूँ उन्होंने वहाँ बतया था कि अआप अब तक जो २ बोलते थे उसे भूल जाओ और जो हम बता रहे हैं उसे ही याद रखना और प्रयोग भी करना और खूब अभ्यास यानि प्रेक्टिस भी करना घ जा कर भी नही तो भूल जाओगे और भूल गये तो फिर नौकरी पर रहना मुश्किल होगा | इस लिए फिर बताया जा रहा है कि इसे घर बाहर , सोते जागते , उठते बैठते हमेह्सा याद रखना  |
लडके ने नौकरी की मजबूरी के लिए यह बात गाँठ में बांध ली की अब जो यहाँ बताया , पढ़ाया व समझाया जा रहा है वह उस का  खूब अभ्यास करेगा घर पर भी और बाहर भी | अगले दिन जब भरोसे लाल सो कर रोज मर्रा  के काम में लग गया तो उस ने किसी काम से अपने लाडले सुपुत्र को आवाज लगाई लड़का आज्ञाकारी तो था ही तुरंत आया और बोला कि बताइए मैं आप की क्या सहायता कर सकता हूँ | भरोसे लाल को एक बार तो यह बात समझ में नही आई कि वह क्या कह रहा है परन्तु जब समझ में आई तो बस पूछो मत , भरोसे लाल तो भडक गया उस का तो दिमाग ही खराब हो गया और उस के गुस्से का ठिकाना नही रहा परन्तु फिर भी वह अपने गुसे पर काबू करते हुए बोला कि बेटे ये बता मैं कोई लंगड़ा लूला हूँ या अँधा काना हूँ या अपाहिज हूँ  और यह भी सुन ले अभी तो तुझ से भी तेज दौड़ सकता हूँ अपने जमाने में सौ २ दंड बैठ किया करता था और अभी तो दस कोस पैदल भी चल सकता हूँ और तू कह रहा है कि तू मेरी सहायता करेगा बता तू मेरी क्या सहायता करेगा | अरे अभी तो तुझे ठीक से नाक पौंछना भी नही आता , आया बड़ा मेरी सहायता करने चल बस भाग जा अब यहाँ से मेरी आँखों के सामने से दूर जा |
भरोसे लाल का गुसा सातवें आसमाँ पर था परन्तु उस के लडके को समझ नही  आ रहा था कि उस से ऐसी क्या गलती हो गई जो उसे इतना प्यार करने वाला उस का बापू आज उस पर इतना नाराज  हो रहा है | वह बेचारा रुआंसा हो गया इतनी देर में उस की माँ भी आगे और अपने लाडले को रुआंसा देख कर वह भी रुआंसी हो गई | भरोसे लाल की ओर देख कर उस से कुछ पूछने की उस की हिम्मत नही हुई परन्तु उस ने अपने कलेजे के टुकड़े को देख कर उसे ही पूछना ज्यादा बेहतर समझा कि बेटा बता क्या बात हो गई है जो तेरा बापू आज इस तरह गुस्सा कर रहा है , कोई नुकसान हो गया है क्या तुझ से या शहर में किसी ने तुझ से पैसे छीन लिए है क्योंकि शहर में अब सरे आम गुंडा दर्दी हो रही है और कमजोर या शरीफ आदमी तथा महिलाओं को तो कोई कुछ समझता ही नही बस जरा सी असावधानी हुई कि बस पूछो मत मोटर साइकिलों पर गुंडे आते हैं और लूट कर चम्पत हो जाते हैं | अब तो किसी को पुलिस का नाम को भी डॉ नही रहा है उलटे पुलिस ही गुंडों से अपनी जान ऐसे बचाती फिरती है जैसे घोटालों में घिरी सरकार विपक्ष से मुंह छुपाती है ऐसे ही पुलिस भी गुंडों को देख कर इधर उधर मुंह कर लेती है या वहाँ से चुप चाप खिसक जाती है |
माँ द्वारा उस का पक्ष यानि हिमायत लेने के कारण लडके की जान में जान आई परन्तु इस कृत्यज्ञता को  ज्ञापित करने के लिए उस ने माँ से कहाँ कि आप ने मेरे लिए समय दिया व मुझ से पूछने के लिए आप का धन्यवाद | परन्तु उस की यह बात उस की माँ की भी  एकाएक समझ में नही आई कि यह क्या कह रहा है परन्तु वह कभी कभार  शहर में आती जाती थी तो उस ने किसी २ से धन्यवाद सुन रखा था तो उस ने धन्यवाद समझ लिया परन्तु वह भी भरोसे लाल की ही  तरह एक बार तो बहुत क्रोध में आ गई परन्तु लडके के मुंह को देख कर उस ने भी अपना गुस्सा दबा लिया और बोली बेटा तू मुझे किस बात का धन्यवाद दे रहा है | अपनों को कोई धन्यवाद कहता है क्या ? कल भी जब मैं तुझे रोटी खिला रही थी तो तब भी तू बार २ धन्यवाद २ कहे जा रहा था जैसे राम २ रट रहा हो |
लडके ने माँ को समझाना चाहा कि जब कोई तुम्हारा काम करे तो उस का  धन्यवाद करना चजिये | परन्तु बेटे हम तो तुम्हारे अपने हैं तुम इस तरह धन्यवाद २ कहते रहोगे तो फिर काम कब करोगे ऐसे तो तू मुझे सुबह से शाम तक धन्यवाद ही कहता रहेगा और कुछ  ही दिनों में तो लगता है ध्न्य्वाद्फ़ कहते २ यह इतना रट जायेगा कि बिना बात सोते २ भी तू धन्यवाद २ रटता रहेगा क्यों कि मैं तो सुबह से ही घर के कामों में लग जाती हूँ और रात hone तक भलस मुझे फुर्सत कहाँ मिलती है | सुबह झाड़ू बुहारी , अल्फार यानि नाश्ता तेरे ले जाने के लिए रोटी दोपहर का काम , लत्ते कपड़े खेत खलिहान पशुओं को चारा पानी आदि और फिर शाम का खाना बता कहाँ तक गिनवाऊँ और तू इन सब कामों के कितने धन्यवाद करगा और मेरे पास तो इतने धन्यवाद इक्कट्ठे हो जायेंगे कि हगर में तो इन्हें रखने की भी जगह नही मिलेगी फिर बता इस छोटे से घर में हम खुद रहेंगे या तेरे धन्यवादों  को रखेंगे |
परन्तु लडके की समझ में नही आया कि पता नही माँ भी बापू की ही तरह क्यों नाराज हो रही है माँ तो मुझ से कभी आज तक नाराज ही नही हुई | आज पता नही इन दोनों को क्या हो गया है जो ऐसे नाराज हो रहे हैं | उसे कुछ भी नही सूझ रहा था और उस के माँ बापू भी कुछ समझ नही पा रहे थे कि लड़का तो शहर में जा कर पराया हो गया लगता है या हमे पराया समजने लगा है जैसे हम इस के कुछ लगते ही नही है क्या हम ने इसे इसी लिए अपने पेट पर पट्टी बांध कर जैसे तैसे पढ़ाया था भरोसे लाल और उस की पत्नी दोनों ही बेचातरे बड़े उदास हो गये |
वे दोनों अपने भग्य को बिना बात कोस रहे थे तभी अचानक मैं उन के घर पहुंच गया | भरोसे लाल मेरा बचपन का दोस्त है हम दोनों ने साथ २ पढाई तो कम ही की है अपितु दोनों ने मिल कर शरारतें कहूँ की हैं बचपन में पड़ोसियों को खूब परेशान किया है किसी के पेड़ से अमरुद तो किसी के पेड़ से आम छुप २ कर खूब तोड़े २ कर खाए हैं | कई बार हमारी पिटाई भी साथ २ ही हुई है यानि हम दोनों खूब गहरे दोस्त हैं और यह बात उस की और मेरी श्री मती जी को भी अच्छी तरह पता है और वे दोनों भी हमारी दोस्ती का खूब ही लिहाज भी करती हैं | जब मैं उन के घर पहुंचा तो मुझे स्तिति समझने में डरे नही लगी कि जरूर कोई बड़ी ग्म्म्भी समस्या दोनों के सामने है मेरी भी उन से प्रश्न पूछने की हिम्मत नही हुई | मैं भी जा कर चुप चाप बैठ गया |
थोड़ो देर में भाभी जी यानि भरोसे लाल की पत्नी मेरे लिए चाय बनाने के लिए अंदर जाने लगी | मैंने रोक लिया और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तब उन्होंने बताया कि समस्या यह है कि उन का तो अपना लड़का ही पराया हो गया बता भाई अब हम क्या करेंगे |  हम तो लुट गए अब  हमारा तो बुढ़ापा कैसे कटेगा यह फ़िक्र सताने लगी है |परन्तु मैंभी उस के लडके को जनता हूँ वह ऐसा कर ही नही सकता था परन्तु आजकल की हवा का क्या खा जा सकता है कब किधर चलने लगे | मैंने पूरी बात पता कि तो पता चला कि असली समस्या तो सहायता और धन्यवाद की हाउ जो आजकल भुरास्त्रिय कम्पनियों की व्यापारिक भाषा के रूप में तेजी से फ़ैल रही है और जिस के कारण यहाँ की भाषा ही क्या संस्कृति और परम्पराएँ भी नष्ट प्राय:हो रही है परन्तु धन्यवाद करना तो कोई समस्या नही है परन्तु असली समस्या तो उस के अंग्रेजी से हिंदी में शब्दानुवाद की है | हम देश काल और वातावरण की अनुरूपता को समझे बिना जब मात्र शाब्दिक अनुवाद ही करने का प्रयत्न करते हैं तो ही यह समस्या आती है |
मुझे एक परिहास याद आया जो मैंने माहौल को हल्का करने के लिए अपने मित्र को सुनाया कि एक अंग्रेज ने किसी गलती पर अपने लडके को चांटा मार दिया तो लडके ने उसे रोने से पहले थैंक यू पापा  आप ने मुझे चांटा मारा  यह कहा और बाद में रोना शुरू किया मेरे इस चुटकले से वे दोनों मुस्करा दिए तब मैंने उन्हें बताया कि जहाँ आप का लड़का काम करता है वहाँ पर उसे यही भाषा तो बोलना सिखाया जाता है और उन के यहाँ नौकरी करने की यह जरूरी शर्त भी है और उसे वहाँ बताया गया होगा कि इस को ज्यादा से ज्यादा बोल कर अभ्यास करना | इसी लिए उस ने आप से इस प्रकार बात की होगी | भरोसे लाल तेरा लड़का जितना शरीफ है इतना तो पूरे गाँव में भी नही मिलेगा परन्तु भरोसे लाल यह बात भी समझ लो कि जिन का हमारे उपर शासन होता है वह चाहे राजनितिक शासन हो या आर्थिक शासन जिस के हम अब भी गुलाम हैं तो गुलामों को तो  प्रभूओं की ही भाषा अपनानी ही पडती है तेरा लड़का होनहार है जो इतनी बड़ी कम्पनी में लग गया है भाई व्यापर के रास्ते ही तो गुलामी आती है जैसे पहले आई थी और दुबारा फिर आने को है |
भरोसे लाल को मेरा भाषण कुछ समझ तो आया परन्तु उस के गले नही उतरा क्यों कि उस तर्क कि हम तो माँ बाप हैं कोई ग्राहक थोड़ी हैं | पर भरोसे लाल इसे इस का अभ्यास भी तो करना है सो वह घर पर ही तो करेगा बता और कहाँ जायेगा और नौकरी भी जरूरी है क्यों कि एक तो अब खेती करना भी मंहगा हो गया है जिस में कुछ बचत नही रही किसान को तो कुछ मिलता नही है अपितु किसान की मेहनत तो  बिचौलिए ही खा जाते हैं और दूसरा जमीन बची ही कहाँ है सरकार ने खेती की जमीन को भी अपने कब्जे में कर के गैर किसनो को दे दिया है तो बता तेरा लड़का नौकरी नही करेगा तो क्या करेगा और नौकरी के लिए उसे यह सीखना ही पड़ेगा |
भरोसे लाल मेरा भाषण सुनता तो रहा पर उस के गले मेरी बात उतर नही रही थी यह मुझे भी पता था पर मजबूरी उस की भी थी और उस लडके की भी थी जो शायद थोड़े दिन में अपने आप दूर हो जानी थी |
डॉ. वेद व्यथित 

लेखक/रचनाकार: डॉ.वेद व्यथित

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