टेक्नोलॉजी बना रही है उल्लू

2011-10-11 06:57 PM को जरा हटके पर प्रकाशित

 

आज के बच्चों को अपने माता-पिता के विपरीत सामान्य व्यावहारिक बातें पता नहीं होतीं, जैसे कि नक्शा देखना, गांठ लगाना या दिक्सूचक का इस्तेमाल करना। यह जानकारी एक अध्ययन में सामने आई है।  अध्ययन में कहा गया है कि गांठ लगाना या नक्शा समझना, किसी समय बच्चों को सिखाए जाने वाले आवश्यक ज्ञान में शामिल थे। लेकिन इस तरह के व्यावहारिक ज्ञान अब धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं।ब्रिटेन में पांच बच्चों में से मात्र एक बच्चा (यानी 20 प्रतिशत) ही दोहरी गांठ लगा सकता है, या साइकिल के चपटे टायर की मरम्मत कर सकता है। समाचार पत्र 'डेली एक्सप्रेस' द्वारा जारी रपट में कहा गया है कि शिविर के दौरान केवल आधे बच्चों को ही पता होता है कि कैसे तम्बू लगाया जाए, कैसे दिक्सूचक इस्तेमाल किया जाए या खाना पकाया जाए।लेकिन यहीं पर ई-मेल भेजना और संगीत डाउनलोड करना लगभग सभी बच्चों जानते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि व्यावहारिक ज्ञान का स्थान आधुनिक प्रौद्योगिकी ने ले लिया है। जीवन रक्षा विशेषज्ञ बीयर ग्रिल्स ने बच्चों से आग्रह किया है कि उन्हें बुनियादी ज्ञान की ओर लौटना चाहिए और ऐसे कौशल सीखने चाहिए जो उन्हें पूरे जीवन काम आएं। ग्रिल्स स्काउट प्रमुख भी हैं।ग्रिल्स ने कहा, ''व्यावहारिक ज्ञान स्काउटिंग की मुख्य बात है। हम हर युवा को प्राथमिक उपचार से लेकर खाना पकाने तक की कला सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जो उन्हें पूरे जीवन काम आ सकती है। ये व्यावहारिक ज्ञान बच्चों को जीवन की कठिनाइयों से मुकाबला करने में मददगार होते हैं।''अनुसंधानकर्ताओं ने आठ से 15 वर्ष उम्र के 508 बच्चों से प्रश्न पूछे थे। उन्होंने 2,020 वयस्कों से भी बात की थी। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश लोगों का मानना था कि आज के किशोरों में वह व्यावहारिक ज्ञान नहीं है, जो व्यावहारिक ज्ञान उनके पास इस उम्र में हुआ करता था।

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