लेह त्रासदी का एक सालः सुनो पर्यावरण कुछ कहता है!

2011-08-30 12:03 PM को जरा हटके पर प्रकाशित

पिछले वर्ष लद्दाख के लेह में बादल फटने के कारण हुई तबाही अब भी लोगों की जेहन में ताजा है। 5-6 अगस्त 2010 की रात लेह पर जैसे आसमान से कहर टूट पड़ा। बादल फटने के कारण लेह में विभिषिका का जो तांडव हुआ उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। अचानक आई बाढ़ के कारण नदी और नाले उफान पर आ गए और पल भर में ही लेह को अपनी चपेट में ले लिया। विकराल धारा ने मीलों लंबी सड़कों, पुलों, खेत बगीचे और घरों को देखते ही देखते लील लिया। तेज बहाव ने नए और पुराने या मिट्टी या कंक्रीट से बने घरों व भवनों में कोई भेदभाव नहीं किया। करीब 257 से ज्यादा लोगों ने अपनी जाने गंवाईं। इनमें 36 गैर लद्दाखी भी शामिल हैं।
घटना के एक साल बाद भी त्रासदी की झलक लेह में देखी जा सकती है। अब भी सड़कों के दोनों किनारे मलबे के उंचे-उंचे ढेर विभिषिका की दास्तां बयां करते हैं। लेह के अधिकतर गांव इसकी चपेट में आए थे। सबसे ज्यादा तबाही चोगलमसर गांव में हुई। जहां लगभग पूरा गांव ही तबाह हो गया। हादसे में कई परिवार उजड़ गए। कहीं पूरा का पूरा परिवार ही इसकी भेंट चढ़ गया तो किसी परिवार में इक्के-दुक्के लोग ही बचे। त्रासदी के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव उपाय किए। पुर्नवास के लिए प्रत्येक परिवार को दो-दो लाख रुपए दिए गए। सरकार के गंभीर प्रयास के कारण ही पीड़ितों को जल्द नए मकान प्रदान किए गए। ताकि जीवन फिर से पटरी पर लौट सके।

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