साहित्य
कहानियां
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याद है वह अनमोल उपहार
अलमारी से कपड़े निकालते-निकालते हल्के हरे रंग का एक रुमाल हाथ में आ गया , जिस पर गाढ़े हरे रंग से फूल के सुंदर डिज़ाइन के ऊपर मंडे यानी सोमवार लिखा हुआ था. उस रुमाल को हाथ में… - अकेले होने का अहसास
- शायद!
- अनमोल सीख
- अघरा
- खुदा की मार
- आशीर्वाद फलित हुआ
- एक बार आओ तो सही
कविताएं
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मेरी आवाज़ सुनो
वे वजह उलझना मेरी फितरत नहीं है ! जुल्मो को मैं सहता नहीं, पलटकर वार करता हूँ मैं, आक्रोश को मैं छिपाता नहीं ! चुप रहना मेरी आदत है, बहस मैं करता नहीं, दादागिरी जो करते हैं, … - जिंदगी
- वो अधजली लौ
- फसल
- शब्द
- सुनसान रास्तें
- हिंदी की पुकार
- माइक्रोफोन
गजलें
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यूं सम्बंध बड़े गहरे हैं
यूं सम्बंध बड़े गहरे हैं बस लोगों के दो चेहरे हैं| बाहर तो भरपूर उजाला पर भीतर तम के पहरे हैं| बहुत प्रेम से दिये आपने अब तक सारे घाव हरे हैं|… - घर अपना ही घर होता है
- आज बेबस हुये सरकार क्यों रफ्ता रफ्ता
- मिलके भी नहीं मिलते
- मुझे कुछ तुमसे कहना है
व्यंग्य
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नेता जी को तोहफा
नेता जी ने गाँव से आकर दिल्ली में रिक्सा चला कर अपनी किस्मत आज़माईस करके अपनी जड़ जमानी शुरू की ! रहने के लिए एक झुग्गी का इंतज़ाम भी हो गया था ! गाँव में दरिद्र नारायण… - जय हो डॉगीज़ की किट्टी पार्टी की
- तांबे का लोटा
- नजर बनाये रहिये
- महान प्रजाति कुत्ता जी
- सहायता और धन्यवाद
- और यमराज दरवाजे पर
- नाक यानि नाक मतलब नाक
पुस्तक समीक्षा
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समीक्षा, लघु पत्रिका "शबरी शिक्षा समाचार" की
शबरी शब्द भारतीय लॊकमानस के अंतर में बसा है|जिस भीलनी ने भगवान राम को जूठे बेर महज इसलिये खिलाये थे कि कहीं भूल से कोई खट्टा बेर उन्हें न मिल जाये और मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने कैसे बड़े प्रेम से…
संस्मरण
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कसक
हमने बचपन में एक कहानी सुनी थी कि, एक दुर्घटना में एक बच्चे को अपना एक पांवं कटवाना पड़ा. उसने और परिवारवालों ने फिर भी शुक्र मनाया कि, कम-से-कम बच्चे की जान तो बच गई. कुछ समय तक… - तब मज़े-ही-मज़े थे
- जब वह मुझसे भी आगे निकल गई
- बंदर कही बिगाड़ू कहीं दयालु
- और यमराज दरवाजे पर २
- घसेटू से घसीटा राम
- वह रिक्शा वाला
- बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न महादेवी वर्मा
