साहित्य / संस्मरण
कसक
2012-09-11 11:23 AM को संस्मरण पर प्रकाशित
हमने बचपन में एक कहानी सुनी थी कि, एक दुर्घटना में एक बच्चे को अपना एक पांवं कटवाना पड़ा. उसने और परिवारवालों ने फिर भी शुक्र मनाया कि, कम-से-कम बच्चे की जान तो बच गई. कुछ समय तक…
[ लेखक : लीला तिवानी ]
[ लेखक : लीला तिवानी ]
तब मज़े-ही-मज़े थे
2012-07-12 10:05 AM को संस्मरण पर प्रकाशित
आज दिल्ली में डेढ़-दो महीने की गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने थे. सब बच्चे, बच्चे क्या बच्चों के माता-पिता का होमवर्क चैक होने वाला था.कारण तो आप सबको पता ही होगा कि, आजकल होमवर्क में प्रॉजेक्ट…
[ लेखक : लीला तिवानी ]
[ लेखक : लीला तिवानी ]
जब वह मुझसे भी आगे निकल गई
2012-06-28 01:54 PM को संस्मरण पर प्रकाशित
बात 1985 की है। मेरी नौवीं कक्षा में एक नई छात्रा आई थी। बहुत प्यारी-सी, मितभाषिणी, मृदुभाषिणी। पढ़ने में मन लगाती थी। कभी-कभी किसी बात को दोबारा-तिबारा भी समझने आती थी। हां, कविता-कहानी के प्रति उसमें अच्छी समझ थी।…
[ लेखक : लीला तिवानी ]
[ लेखक : लीला तिवानी ]
बंदर कही बिगाड़ू कहीं दयालु
2012-05-07 12:07 PM को संस्मरण पर प्रकाशित
नौर्थ सौउथ ब्लॉक जहाँ केंद्रीय सरकार के मंत्रालय हैं वहाँ अधिकारियों कर्मचारियों से ज़्यादा बंदर हैं !
ये बंदरों की पैतृक संपति है ! इनके पूर्वज जब यहाँ उस जमाने से हैं जब यहाँ कोई बस्ती नहीं थी,…
[ लेखक : हरेन्द्र सिंह रावत ]
[ लेखक : हरेन्द्र सिंह रावत ]
और यमराज दरवाजे पर २
2012-05-05 07:58 AM को संस्मरण पर प्रकाशित
आगे ..
आज उनके जन्म दिन की खुशी में घर बाहर खूब सजाया गया था, प्रवेश द्वार रंग बिरंगी
रोशनियों से स्वागत शब्दों की चमक दमक ने, समियाना को छोटी छोटी चाइना बलबों
की मन मोहक जलती…
[ लेखक : हरेन्द्र सिंह रावत ]
[ लेखक : हरेन्द्र सिंह रावत ]
घसेटू से घसीटा राम
2012-04-26 02:56 PM को संस्मरण पर प्रकाशित
दादा बड़े प्यार से उसे घसेटू कहा करते थे जब की अब वह बड़ा हो चुका था ! वह बुरा नहीं मानता था
जब दादा जी उसके दोस्तों के सामने ही उसे कहते थे 'ओ घसेटू बेटा…
[ लेखक : हरेन्द्र सिंह रावत ]
[ लेखक : हरेन्द्र सिंह रावत ]
