साहित्य / पुस्तक समीक्षा



समीक्षा, लघु पत्रिका "शबरी शिक्षा समाचार" की

2012-02-22 02:49 PM को पुस्तक समीक्षा पर प्रकाशित
  शबरी शब्द भारतीय लॊकमानस के अंतर में बसा है|जिस भीलनी ने भगवान राम को जूठे बेर महज इसलिये खिलाये थे कि कहीं  भूल से कोई खट्टा बेर उन्हें न मिल जाये और मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने कैसे बड़े प्रेम से…

[ लेखक : प्रभुदयाल श्रीवास्तव ]